ब्रेकिंग
कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में AI-मीडिया शोध केंद्र की शुरुआत, राज्यपाल डेका ने दिया पत्रकारिता का ... छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, 11 सितंबर से बारिश का अलर्ट; बिलासपुर में सामान्य से अधिक बारि... फ्लाइट बंद होने के बीच राहत की खबर, बिलासपुर से Fly91 भर सकती है उड़ान भिलाई में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो; दो युवकों की मौत लखनऊ में पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति का पहला स्थापना दिवस, 17 राज्यों के पत्रकारों ने दिखाया एकजुटता ... CG News:- लूट के माल के बंटवारे पर गैंग में घमासान! मारपीट ने खोला पूरा राज, रीवा से आई पिस्टल से लू... छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम, रायपुर-बिलासपुर समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य का सम्मान, छत्तीसगढ़ के 64 शिक्षकों को राज्यपाल करेंगे सम्मानित दर्दनाक सड़क हादसा, पेड़ से टकराई बाइक; दो नाबालिगों की मौके पर मौत कर्ज वसूली के नाम पर बर्बरता, महिला और बेटे को बंधक बनाकर पीटा; निर्वस्त्र कर वीडियो बनाने का आरोप
बिलासपुर

डॉ. सहारे की याचिका खारिज: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को एक महीने बाद ठहराया सही

बिलासपुर। एक महीने बाद ही सही सिम्स के तत्कालीन डीन डा केके सहारे के खिलाफ राज्य शासन द्वारा जारी निलंबन आदेश को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सही ठहराया है। डा सहारे की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही पूर्व में शासन के निलंबन आदेश पर लगाई रोक को भी कोर्ट ने हटा लिया है।

बता दें कि निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए डा सहारे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने शासन के फैसले पर रोक लगा दी थी। तब सिम्स में दो-दो डीन कामकाज कर रहे थे। हाई कोर्ट के फैसले के बाद शासन की भद भी पिटी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले से अब जाकर स्वास्थ्य मंत्री व राज्य शासन को राहत मिली है।

राज्य शासन की ओर से कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने बताया कि सिम्स के तत्कालीन डीन डा सहारे के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में जांच की जा रही है। जांच में डा सहारे का रवैया असहयोगात्मक रहा है।

वे जांच दल को सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनसे जो जवाब मांगा जा रहा है वे नहीं दे रहे हैं। इससे जांच भी लगातार प्रभावित हो रहा है और अनावश्यक विलंब भी हो रहा है।

ला अफसर का यहां तक कहना था कि वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के दौरान उनका महत्वपूर्ण पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। जांच की दिशा बदलेगी और काफी हद तक जांच को प्रभावित भी कर सकते हैं। इन दोनों ही बातों से इंकार नहीं किया जा सकता।

ला अफसर की बातों और तर्कों से सहमति जताते हुए कोर्ट ने डा सहारे को जांच में सहयोग करने की हिदायत दी साथ ही इस बात को लेकर नाराजगी भी जताई कि जांच में सहयोग ना करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button